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                <title>धार्मिक - Wagad Sandesh</title>
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                <description>धार्मिक RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>रामायण मनका108 का 80वां पाठ सम्पन्न, भक्ति रस में डूबे श्रद्धालु</title>
                                    <description><![CDATA[<p><span style="color:rgb(126,140,141);">पुनर्वास कॉलोनी में शंकरलाल भोई के निवास पर श्री रामेश्वर भक्त मंडल द्वारा आयोजित <em>रामायण मनका 108</em> का 80वां पाठ भक्ति भाव एवं श्रद्धा से हुआ। </span></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.wagadsandesh.com/religious/devotees-submerged-in-the-80th-recitation-of-ramayana-manka-108/article-142"><img src="https://www.wagadsandesh.com/media/400/2025-06/whatsapp-image-2025-06-29-at-11.34.52-am.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>डूंगरपुर।</strong> शनिवार शाम पुनर्वास कॉलोनी में शंकरलाल भोई के निवास पर श्री रामेश्वर भक्त मंडल द्वारा आयोजित <em>रामायण मनका 108</em> का 80वां पाठ भक्ति भाव एवं श्रद्धा से हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ संतोष भोई द्वारा मंत्रोच्चार के साथ प्रभु श्रीराम की पूजा-अर्चना एवं तिलक के पश्चात दीप प्रज्वलन से किया गया, जिसे यजमान शंकरलाल भोई ने सम्पन्न किया। कार्यक्रम में मयंक भोई ने गुरु वंदना, चिराग भोई ने सरस्वती वंदना एवं विस्मय भोई ने गणेश वंदना प्रस्तुत की। अशोक भोई ने हनुमानजी का आह्वान कर उन्हें आसन पर विराजमान कर पाठ आरंभ कराया। रामायण पाठ की मुख्य प्रस्तुति मुकेश भोई, अजय भोई, प्रितम भोई एवं विशाल भोई द्वारा दी गई।मातृशक्ति की ओर से निशा भोई, तमन्ना भोई, नित्या भोई, सुनीता भोई, पुष्पा भोई, रेखा भोई और पिंकी भोई ने भावपूर्ण चौपाइयों का गायन कर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। </p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.wagadsandesh.com/media/2025-06/whatsapp-image-2025-06-29-at-11.34.52-am.jpeg" alt="WhatsApp Image 2025-06-29 at 11.34.52 AM" width="4032" height="2268"></img></p>
<p style="text-align:justify;">हनुमान चालीसा का पाठ नरेश सेवक, राकेश भावसार एवं चिराग सोमपुरा द्वारा किया गया। भजन मंडली के रघुवीर भोई ने ढोलक पर संगत दी जबकि दिव्य भोई एवं जिज्ञांश भोई ने मंजीरों एवं अन्य वाद्य यंत्रों से संगत कर माहौल को भक्तिमय बनाया। भजनों में मुकेश भोई ने "तेरे चरणों से लिपट जाते हैं..." तथा अजय भोई ने "मेरा श्याम दीवाना है उस राधा रानी का..." जैसे भजनों से वातावरण को भावविभोर किया। समापन अवसर पर यजमान परिवार सहित सभी रामभक्तों ने सामूहिक आरती की। आरती उपरांत फल-प्रसाद वितरण किया गया। यजमान के पुत्र आशीष भोई ने मंडल परिवार का आभार प्रकट करते हुए सभी को उपरणा पहनाकर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन मंडल अध्यक्ष राजेश भोई द्वारा किया गया। इस अवसर पर कमलेश रावल, प्रताप रावल, मुकेश भोई, कन्हैयालाल भोई, हरीश भोई, योगेश रावल, हितेष भोई, रवि भोई सहित मंदाकिनी, संगीता भोई, शर्मिला भोई, माया कलाल, शीला भोई, मीना भोई एवं अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>डूंगरपुर</category>
                                            <category>धार्मिक</category>
                                            <category>सागवाड़ा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Jun 2025 12:04:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[वागड़ संदेश ब्यूरो]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गायत्री शक्ति पीठ पर जिला स्तरीय बैठक आयोजित  : दिव्य ज्योति रथ यात्रा पर चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[<p dir="ltr"><span style="color:rgb(126,140,141);">वागड़ के दिव्य तीर्थ श्री राम नगर गायत्री शक्तिपीठ सागवाड़ा में जिला स्तरीय बैठक।</span><br /><span style="color:rgb(126,140,141);">वंदनिया माताजी भगवती देवी का जन्म शताब्दी महोत्सव।</span></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.wagadsandesh.com/religious/district-level-meeting-held-on-gayatri-shakti-peeth-held-divya/article-87"><img src="https://www.wagadsandesh.com/media/400/2025-06/gaytri-parivar.jpeg" alt=""></a><br /><p dir="ltr" style="text-align:justify;"><strong>सागवाड़ा </strong>| अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में वागड़ के दिव्य तीर्थ श्री राम नगर गायत्री शक्तिपीठ सागवाड़ा में जिला स्तरीय बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में सर्वप्रथम समस्त गायत्री परिजनों को 5 मिनट की सामूहिक साधना ओंकार नाद एवं प्रार्थना दीपक कुमार जोशी द्वारा करवाई गई जिसके बाद मुख्य प्रबंध ट्रस्टी नारायण लाल पंड्या के मार्गदर्शन में रामचंद्र मेहता मुख्य प्रबंध ट्रस्टी गायत्री शक्तिपीठ आसपुर एवं नानूराम भट्ट मुख्य प्रबंध ट्रस्टी गायत्री शक्तिपीठ डूंगरपुर द्वारा दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। शांतिकुंज प्रतिनिधि रमाशंकर सिंह की अध्यक्षता में बैठक प्रारंभ की गई। गायत्री शक्तिपीठ सागवाड़ा के मुख्य प्रबंध ट्रस्टी नारायण लाल पंड्या द्वारा उपस्थित समस्त परिजनों का शब्द सुमन द्वारा स्वागत करते हुए बैठक के विभिन्न बिंदुओं की जानकारी दी गई। अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा संपूर्ण विश्व में राष्ट्र जागरण दिव्य ज्योति रथ यात्रा, वंदनिया माताजी भगवती देवी के जन्म शताब्दी महोत्सव एवं अखंड दीपक के 100 वर्ष पूर्ण होने पर चलाई जा रही है अगले वर्ष राष्ट्र जागरण दिव्य ज्योति रथ यात्रा डूंगरपुर जिले में प्रवेश करेगी इस हेतु रूपरेखा बनाई गई ।शांतिकुंज प्रतिनिधि रमाशंकर सिंह द्वारा मानव में देवत्व का उदय और धरती पर स्वर्ग के अवतरण "की परिकल्पना को साकार रूप देने हेतु समस्त गायत्री परिजनों को अपना समय ,साधन, प्रभाव ,प्रतिभा और धन का एक अंश देने हेतु प्रेरित किया गया। गायत्री परिवार के सप्तसूत्री आंदोलन में हरीतिमा संवर्धन, कुरीति उन्मूलन, स्वास्थ्य, स्वाध्याय,व्यसन मुक्ति, नारी जागरण को जन-जन तक पहुंचाने हेतु सभी कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी गई। पुष्कर से आए हेमंत चतुर्वेदी द्वारा गायत्री शक्तिपीठ पुष्कर में चलाई जा रही सावित्री साधना पर विशेष संबोधन दिया गया एवं सबको सावित्री साधना हेतु पुष्कर आने हेतु कहा गया ।वर्तमान समय संपूर्ण विश्व में सृजन और विनाश के पथ पर चल रहा है विश्व के कई देशों में महायुद्ध और तृतीय विश्व युद्ध जैसी स्थितियां बन रही है ऐसे समय में अखिल विश्व गायत्री परिवार के संस्थापक युग ऋषि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा की गई भविष्यवाणियों पर चर्चा करते हुए भारत पुन:संपूर्ण विश्व का नेतृत्व करेगा और ज्ञान के क्षेत्र में, शौर्य के क्षेत्र में, धन-धान्य के क्षेत्र में पुनः विश्व को शांति का संदेश देगा। इस अवसर पर गायत्री परिवार के जिला संयोजक भूपेंद्र पंड्या द्वारा संपूर्ण जिले में अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा चलाई जा रही भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा को आयोजित कर राजस्थान प्रांत में प्रथम स्थान प्राप्त करने हेतु प्रेरित किया गया। साथ ही 10 जुलाई को गुरु पूर्णिमा महोत्सव मनाने एवं जन-जन तक भारतीय संस्कृति के दो निर्माता यज्ञ पिता गायत्री माता को पहुंचाने हेतु कार्यकर्ताओं को गुरु पूर्णिमा आमंत्रण पत्र गांव-गांव ढाणी ढाणी घर-घर तक पहुंचाने हेतु जिम्मेदारियां दी गई। इस अवसर पर गायत्री शक्तिपीठ सागवाड़ा के सहायक प्रबंध ट्रस्टी किशोर भट्ट, सचिव ट्रस्टी वेलचंद पाटीदार, ट्रस्टी हरिमुख भट्ट, रमेश पाटीदार, पंकज पाटीदार, वासुदेव शर्मा, भगवती प्रसाद चौबीसा एवं संपूर्ण जिले से गायत्री चेतना केंद्र चिखली से वेलचंद् पाटीदार, डायालाल पाटीदार, धनेश्वर पाटीदार, सीमलवाड़ा से अमर सिंह लबाना ,डूंगरपुर से गिरीश कलाल आसपुर से जगदीश सोनी, अमृतलाल कलाल, गणेश जोशी ,शांतिलाल कलाल, लोकेश मेहता, परतापुर से मोहनलाल पटेल, राकेश भट्ट,छापी से रामलाल पाटीदार, करावाड़ा से हरिप्रसाद पाटीदार ,गायत्री शक्तिपीठ सागवाड़ा से मोहनलाल पाटीदार, लवजी पाटीदार, देवलाल फलोत,कमलेश व्यास, अमृतलाल पाटीदार, महेश शर्मा, सुभाष सोमपुरा, मधु सोमपुरा, मयंक जोशी, विवेक भट्ट एवं सैकड़ो गायत्री परिजन उपस्थित रहे। बैठक का संचालन दीपक कुमार जोशी ने किया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ताजा ख़बर</category>
                                            <category>डूंगरपुर</category>
                                            <category>धार्मिक</category>
                                            <category>सागवाड़ा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Jun 2025 21:33:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[वागड़ संदेश ब्यूरो]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सागवाड़ा: मानस मंडल सेवा संस्थान का 740वां सुंदरकांड पाठ, तन पर भस्मी रमावे… भजनों से गूंज उठा बरबोदनिया</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(126,140,141);">सागवाड़ा के मानस मंडल सेवा संस्थान द्वारा आयोजित 740वें संगीतमय सुंदरकांड पाठ व भजन संध्या का आयोजन बरबोदनिया गांव में यजमान कचरू पूंजोत के निवास पर हुआ। भजनों, वंदनाओं और आरती के साथ आयोजन पूर्ण हुआ। हनुमान चालीसा पाठ और प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।</span></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.wagadsandesh.com/dungarpur/sagwara/sagwara-manas-mandal-seva-sansthans-740th-sunderkand-recitation-on-tan/article-57"><img src="https://www.wagadsandesh.com/media/400/2025-06/whatsapp-image-2025-06-08-at-12.47.34-pm-(1).jpeg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong><span style="color:rgb(224,62,45);">सागवाड़ा।</span> </strong>नगर के मानस मंडल सेवा संस्थान की ओर से प्रति शनिवार आयोजित किए जाने वाले संगीतमय सुंदरकांड पाठ व भजन संध्या का 740वां आयोजन इस बार बरबोदनिया गांव में यजमान कचरू पूंजोत के निवास स्थान पर सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत में यजमान कचरूजी ने भगवान श्रीराम और जितेन्द्र पूंजोत ने हनुमानजी का पूजन किया। जितेन्द्र सुथार ने गणपति वंदना और राहुल भगत ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। इसके पश्चात सभी ने ‘राष्ट्रदेवो भव’ की भावना के साथ सामूहिक राष्ट्रगान किया। भरत भट्ट ने हनुमानजी का आव्हान किया, जिसके बाद जितेन्द्र भट्ट व बालमुकुंद भट्ट ने सुंदरकांड की चौपाइयों का गायन किया। मंडल की ओर से जितेन्द्र भट्ट व जगदीश सुथार ने यजमान परिवार का उपरना ओढ़ाकर सम्मान किया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><img src="https://www.wagadsandesh.com/media/2025-06/whatsapp-image-2025-06-08-at-12.47.34-pm.jpeg" alt="WhatsApp Image 2025-06-08 at 12.47.34 PM" width="1156" height="521"></img></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">भजनों की श्रंखला में मंडल अध्यक्ष किशोर भावसार ने "भोला भांग धतूरा खावे तन पर भस्मी रमावे...", जुगल किशोर सोनी ने "सुंदरकांड करे जो कोई हनुमंत खुश हो जाए...", चेतन गोगरोत ने "बजरंगबली मेरी नाव चली...", प्रीतम पंचाल ने "मारो बेड़ों लगा दीजो पार..." और नकुल गोगरोत ने "आवी सोना नि नगरी वारो देव..." जैसे भक्ति रस में डूबे भजन प्रस्तुत किए। विनायक पंचाल व रुद्र नीरज ने ढोलक पर और उत्तम पंचाल, मनोज शर्मा, निलेश गामोट, ललित मिस्त्री, रोशन गामोट ने अन्य वाद्ययंत्रों पर संगत दी। नरेश भट्ट शिवलहरी ने हनुमान चालीसा का पाठ किया। कार्यक्रम के अंत में यजमान परिवार ने भगवान की आरती उतारी और प्रसाद वितरण किया। इस अवसर पर भूपेश गामोट, विष्णु एकोत, गोपाल, विनायक, कुलदीप फलोत, भरतलाल पंचाल, दिलीप जोशी, चंदूलाल, हेतलाल, मानशंकर, लालशंकर सहित आसपास के दर्जनों धर्मप्रेमी उपस्थित रहे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>डूंगरपुर</category>
                                            <category>धार्मिक</category>
                                            <category>सागवाड़ा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Jun 2025 15:46:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[कुलदीप सिंह  (संवाददाता)]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उदयपुर में बन रहा भव्य खाटू श्याम मंदिर :  10 जून को होगा गर्भगृह पूजन; राम मंदिर जैसे पत्थरों का उपयोग</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(126,140,141);">उदयपुर में 10 जून को खाटू श्याम मंदिर के गर्भगृह का पूजन होगा। राम मंदिर जैसे पत्थरों से बना यह मंदिर 2026 तक तैयार होगा। रंगीन लाइटों, फूलों से सजे कार्यक्रम में भजन संध्या, छप्पन भोग व प्रसाद वितरण होगा। यह मंदिर उदयपुर की नई पहचान बनेगा।</span></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.wagadsandesh.com/religious/grand-khatu-shyam-temple-being-built-in-udaipur-will-be-wagadsandesh/article-55"><img src="https://www.wagadsandesh.com/media/400/2025-06/बौध-सौरभ-आपकी-सोच-हमारी-खबरें-11.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>उदयपुर |</strong> </span>में निर्माणाधीन खाटू श्याम मंदिर का गर्भगृह पूजन 10 जून को होगा। उदयपुर-मंगलवाड़ नेशनल हाईवे पर तुलसीदास जी की सराय के पास बन रहे इस मंदिर को 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है। श्री श्याम सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष शशिकांत खेतान ने बताया कि वृंदावन के आचार्य ब्रजेश महाराज के सानिध्य में शाम 5:15 बजे से शिला पूजन होगा। मंदिर को रंगबिरंगी लाइटों से सजाया जाएगा और जयपुर के डेकोरेटर द्वारा कोलकाता-बैंगलोर के फूलों से श्रृंगार किया जाएगा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>कीर्तन और भजन संध्या</strong></span></h5>
<div style="text-align:justify;">कार्यक्रम में कोलकाता के प्रसिद्ध भजन गायक संजू शर्मा कन्हैया म्यूजिकल ग्रुप के साथ प्रस्तुति देंगे। सम्बलपुर (ओडिशा) की शुभांगी सोनी और उदयपुर की केमिता राठौड़ भी भजनों की प्रस्तुति देंगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>छप्पन भोग और प्रसाद व्यवस्था</strong></span></h5>
<div style="text-align:justify;">बाबा को तुलसी, पंचामृत, खीर, चूरमा सहित 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया जाएगा। आरती के बाद सभी भक्तों को प्रसाद वितरण किया जाएगा। ट्रस्टी अशोक पोद्दार ने बताया कि महिला-पुरुषों के लिए अलग-अलग बैठने की व्यवस्था की गई है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>मंदिर की विशेषताएं</strong></span></h5>
<div style="text-align:justify;">- कुल क्षेत्रफल: 1.17 लाख वर्ग फुट</div>
<div style="text-align:justify;">- मुख्य मंदिर का फ्लोर एरिया: 13,000 वर्ग फुट</div>
<div style="text-align:justify;">- सत्संग हॉल: 9,000 वर्ग फुट</div>
<div style="text-align:justify;">- मंदिर की ऊंचाई: 91 फीट</div>
<div style="text-align:justify;">- राम मंदिर जैसे पत्थरों का उपयोग</div>
<div style="text-align:justify;">- पांच मंदिर: गणेश, हनुमान, शिव, राणी सती और खाटू श्याम</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>भविष्य की योजनाएं</strong></span></h5>
<div style="text-align:justify;">आर्किटेक्ट राजू शर्मा के अनुसार, मंदिर परिसर में 100 कमरों की धर्मशाला, गौशाला, वृद्धाश्रम और 30,000 वर्ग फुट का गार्डन भी प्रस्तावित है। मंदिर की स्थिति ऐसी होगी कि डबोक एयरपोर्ट से आने-जाने वालों को राजमार्ग से ही दर्शन हो सकेंगे। </div>
<div style="text-align:justify;">मीडिया प्रभारी डॉ. बालकृष्ण शर्मा ने बताया कि मंदिर का निर्माण कार्य 25 जनवरी 2024 को शुरू हुआ था और अब तक स्लैब की ढलाई का काम पूरा हो चुका है। यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि उदयपुर की एक नई पहचान भी बनेगा।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ताजा ख़बर</category>
                                            <category>प्रदेश</category>
                                            <category>धार्मिक</category>
                                    

                <link>https://www.wagadsandesh.com/religious/grand-khatu-shyam-temple-being-built-in-udaipur-will-be-wagadsandesh/article-55</link>
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                <pubDate>Sun, 08 Jun 2025 12:53:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[वागड़ संदेश ब्यूरो]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रविवार व्रत कथा (Raviwar Vrat Katha in Hindi) — जिसे रविवार के व्रत या सूर्य देव की पूजा के समय पढ़ा या सुना जाता है</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(241,196,15);">रविवार को सूर्यदेव की आराधना कर व्रत रखें। प्रातः स्नान कर अर्घ्य दें, <span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>"ॐ घृणिः सूर्याय नमः"</strong></span> मंत्र का जाप करें। व्रत कथा पढ़ें, दिनभर फलाहार करें और जरूरतमंदों को दान दें। इससे स्वास्थ्य, आत्मबल व सुख-समृद्धि प्राप्त होती है और सूर्य दोष दूर होता है।</span></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.wagadsandesh.com/religious/sunday-fast-story-raviwar-vrat-katha-in-hindi-which-wagadsandesh/article-48"><img src="https://www.wagadsandesh.com/media/400/2025-06/sunday-fast-story-raviwar-vrat-katha-in-hindi-which-wagadsandesh.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>🌞 रविवार व्रत कथा</strong></span></h4>
<h6 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>   <span style="color:rgb(0,0,0);">(Raviwar Vrat Katha in Hindi)</span></strong></span></h6>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">बहुत पुराने समय की बात है, एक नगर में एक धर्मात्मा ब्राह्मण अपनी पत्नी के साथ रहता था। वह सच्चे मन से भगवान सूर्यदेव की पूजा करता था और प्रतिदिन सूर्य को अर्घ्य देता था। उसकी पत्नी भी धार्मिक थी, लेकिन वह व्रतों का पालन पूरी श्रद्धा से नहीं करती थी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">एक बार उस ब्राह्मण ने रविवार का व्रत करना शुरू किया और अपनी पत्नी से भी कहा कि वह भी यह व्रत रखे। पत्नी ने सहमति तो जताई, लेकिन उसने मन से व्रत नहीं किया और एक रविवार को व्रत के दिन ही स्नान किए बिना भोजन कर लिया। यह देखकर सूर्यदेव को क्रोध आ गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">सूर्यदेव ने उस स्त्री को श्राप दे दिया कि “तू जिस भोजन को इतना चाहती है, वह तुझे भविष्य में कभी नहीं मिलेगा और तेरा जीवन दुःखों से भर जाएगा।” कुछ ही समय में ब्राह्मण का घर दरिद्रता से भर गया। भोजन के लिए भी मोहताज हो गए।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">ब्राह्मण को यह परिवर्तन समझ नहीं आया। उसने एक दिन ध्यान लगाया और देखा कि उसकी पत्नी ने व्रत का अनादर किया है। तब उसने पत्नी को समझाया और सूर्यदेव से क्षमा याचना करने को कहा।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">पत्नी को पश्चाताप हुआ। उसने सच्चे मन से सूर्यदेव का व्रत करना शुरू किया। हर रविवार को व्रत करती, सूर्य को अर्घ्य देती, सूर्य मंत्रों का जाप करती और जरूरतमंदों को अन्न-वस्त्र का दान देती।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">कुछ ही समय में उनके घर में पुनः समृद्धि लौट आई। भोजन, धन, सुख-सुविधाएँ सब लौट आए। तब से वह स्त्री और ब्राह्मण दोनों हर रविवार को सूर्यदेव का व्रत करने लगे और जीवन भर सुखी रहे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>संबंधित पढ़े : <span style="color:rgb(53,152,219);"><a style="color:rgb(53,152,219);" href="https://www.wagadsandesh.com/religious/worship-suryadev-on-sunday-in-this-way-according-to-astrology-wagadsandesh/article-47">रविवार को ऐसे करें सूर्यदेव की पूजा, ज्योतिष के अनुसार रविवार के उपाय: दुर्भाग्य से सौभाग्य तक, दूर होंगे रोग और बाधाएं</a></span></strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>🌞 रविवार व्रत का महत्व:</strong></span></h5>
<div style="text-align:justify;"><strong>यह व्रत सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>यह स्वास्थ्य, धन और आत्मबल प्रदान करता है।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>रविवार को व्रत रखने से संतान सुख, रोग नाश और कर्मों की शुद्धि होती है।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>🙏 व्रत विधि संक्षेप में:</strong></span></h5>
<div style="text-align:justify;"><strong>रविवार को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सूर्य को तांबे के लोटे में जल, रोली, गुड़, लाल फूल मिलाकर अर्घ्य दें।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong><span style="color:rgb(224,62,45);">"ॐ घृणिः सूर्याय नमः"</span> मंत्र का जाप करें (108 बार)।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>दिनभर एक समय फलाहार करें या निर्जल व्रत रखें।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सूर्य व्रत कथा का पाठ करें और आरती करें।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>जरूरतमंद को भोजन, वस्त्र या लाल वस्तु का दान करें।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong> </strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>संबंधित पढ़े : <span style="color:rgb(53,152,219);"><a style="color:rgb(53,152,219);" href="https://www.wagadsandesh.com/religious/worship-suryadev-on-sunday-in-this-way-according-to-astrology-wagadsandesh/article-47">रविवार को ऐसे करें सूर्यदेव की पूजा, ज्योतिष के अनुसार रविवार के उपाय: दुर्भाग्य से सौभाग्य तक, दूर होंगे रोग और बाधाएं</a></span></strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धार्मिक</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Jun 2025 17:39:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[वागड़ संदेश ब्यूरो]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रविवार को ऐसे करें सूर्यदेव की पूजा, ज्योतिष के अनुसार रविवार के उपाय: दुर्भाग्य से सौभाग्य तक, दूर होंगे रोग और बाधाएं</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(241,196,15);">रविवार को केवल एक छुट्टी का दिन समझकर व्यर्थ न गवाएं। यह आत्मचिंतन, आराधना और आरोग्यता का दिन है। यदि हम इस दिन को धार्मिक दृष्टिकोण से देखें और इसका सदुपयोग करें, तो जीवन में स्थायी सुख, स्वास्थ्य और शांति प्राप्त कर सकते हैं।</span></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.wagadsandesh.com/religious/worship-suryadev-on-sunday-in-this-way-according-to-astrology-wagadsandesh/article-47"><img src="https://www.wagadsandesh.com/media/400/2025-06/suryadev-puja-1.webp" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>Raviwar ka dharmik mahatva </strong>भारतीय संस्कृति में सप्ताह के प्रत्येक दिन का एक विशिष्ट धार्मिक, आध्यात्मिक और ज्योतिषीय महत्व होता है। इन सात दिनों में रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित है, जिन्हें शक्ति, तेज, स्वास्थ्य और आत्मबल का प्रतीक माना गया है। रविवार न केवल अवकाश और विश्राम का दिन है, बल्कि यह आत्मचिंतन, आराधना और जीवन के प्रति आभार प्रकट करने का श्रेष्ठ अवसर भी प्रदान करता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<img src="https://www.wagadsandesh.com/media/2025-06/surya-pooja.webp" alt="surya-pooja worship-suryadev-on-sunday-in-this-way-according-to-astrology-wagadsandesh" width="1280" height="720"></img>
प्रतीकात्मक चित्र

<p> </p>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>सूर्य देव की आराधना</strong></span></h5>
<div style="text-align:justify;">सनातन धर्म में सूर्य को प्रत्यक्ष देवता माना गया है – "साक्षात देवता"। ऋग्वेद में भी सूर्य की प्रशंसा अनेक मंत्रों द्वारा की गई है। सूर्य से ही पृथ्वी पर जीवन संभव है। वह ऊर्जा का अक्षय स्रोत है। रविवार को विशेष रूप से सूर्य अष्टकम, आदित्य हृदय स्तोत्र, या गायत्री मंत्र का जाप करने से मानसिक और शारीरिक ऊर्जा में वृद्धि होती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>सूर्य देव को अर्घ्य देने की परंपरा</strong></span></h5>
<div style="text-align:justify;">Surya dev ki pooja kaise karein हर रविवार को प्रातःकाल सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा है। जल में लाल फूल, अक्षत और थोड़ी सी गुड़ मिलाकर तांबे के लोटे से सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और मानसिक शांति प्राप्त होती है। यह क्रिया एक प्रकार की ऊर्जा साधना है, जो व्यक्ति को दिनभर सकारात्मकता से भर देती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>संबंधित पढ़े : <span style="color:rgb(53,152,219);"><a style="color:rgb(53,152,219);" href="https://www.wagadsandesh.com/religious/sunday-fast-story-raviwar-vrat-katha-in-hindi-which-wagadsandesh/article-48">रविवार व्रत कथा (Raviwar Vrat Katha in Hindi) — जिसे रविवार के व्रत या सूर्य देव की पूजा के समय पढ़ा या सुना जाता है</a></span></strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>रविवार का व्रत और धार्मिक उपाय</strong></span></h5>
<div style="text-align:justify;">रविवार को सूर्य उपासना व्रत रखने की परंपरा भी है। Raviwar vrat vidhi in Hindi यह व्रत विशेषकर उन लोगों के लिए लाभकारी माना गया है जिनकी कुंडली में सूर्य कमजोर हो या स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बनी रहती हों।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">
<img src="https://www.wagadsandesh.com/media/2025-06/surya-dev.jpg" alt="surya-pooja worship-suryadev-on-sunday-in-this-way-according-to-astrology-wagadsandesh" width="1200" height="800"></img>
प्रतीकात्मक चित्र

</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>रविवार व्रत की विधि: Raviwar vrat vidhi in Hindi</strong></span></h5>
<div style="text-align:justify;"><strong>प्रातःकाल स्नान कर सूर्य को अर्घ्य दें।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>दिनभर एक समय फलाहार करें या उपवास रखें।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सूर्य देव की आरती करें – “जय सूर्यदेव, आदित्य नमः”।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>गेहूं, गुड़, लाल वस्त्र, तांबे के बर्तन का दान करना पुण्यकारी माना गया है।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">रविवार के दिन लाल वस्त्र पहनना, गुड़ और चने की दाल का सेवन करना और दूसरों के प्रति नम्रता रखना आध्यात्मिक रूप से शुभ संकेत देता है। Surya ko arghya dene ka sahi tarika</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>आत्मचिंतन और विश्राम का दिन</strong></span></h5>
<div style="text-align:justify;">रविवार का एक बड़ा धार्मिक पक्ष यह भी है कि यह आत्मचिंतन और आत्मनिरीक्षण का दिन होता है। यह दिन हमें बीते सप्ताह की घटनाओं पर सोचने और आने वाले सप्ताह की योजना बनाने का अवसर देता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>रविवार को करें ये आत्मचिंतन:</strong></span></h5>
<div style="text-align:justify;"><strong>क्या मैंने इस सप्ताह किसी का दिल दुखाया?</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>क्या मैं अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर हूं?</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>क्या मैंने अपने परिवार और समाज के लिए कुछ सकारात्मक किया?</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">जब हम हर रविवार को इस तरह का आत्मचिंतन करते हैं, तो हमारी आत्मा शुद्ध होती है और जीवन में नैतिकता व धर्म की भावना गहरी होती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>संबंधित पढ़े : <span style="color:rgb(53,152,219);"><a style="color:rgb(53,152,219);" href="https://www.wagadsandesh.com/religious/sunday-fast-story-raviwar-vrat-katha-in-hindi-which-wagadsandesh/article-48">रविवार व्रत कथा (Raviwar Vrat Katha in Hindi) — जिसे रविवार के व्रत या सूर्य देव की पूजा के समय पढ़ा या सुना जाता है</a></span></strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<img src="https://www.wagadsandesh.com/media/2025-06/puja.webp" alt="worship-suryadev-on-sunday-in-this-way-according-to-astrology-wagadsandesh" width="1200" height="675"></img>
प्रतिकातक चित्र

<h5 style="text-align:justify;"> </h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>परिवार और भक्ति का संयोग</strong></span></h5>
<div style="text-align:justify;">रविवार वह दिन होता है जब पूरा परिवार एक साथ समय बिताता है। यह समय केवल मनोरंजन या विश्राम का नहीं, बल्कि सामूहिक पूजा, कथा श्रवण, और सत्संग का भी हो सकता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>परिवार के साथ इन धार्मिक गतिविधियों को अपनाएं:</strong></span></h5>
<div style="text-align:justify;"><strong>सामूहिक रूप से रामचरितमानस, श्रीमद्भागवत या किसी धर्मग्रंथ का पाठ करें।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>घर में कीर्तन, भजन या आरती का आयोजन करें।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बच्चों को धार्मिक कहानियाँ और जीवन मूल्यों की शिक्षा दें।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">Raviwar ke totke aur upay इस तरह रविवार केवल एक दिन नहीं रह जाता, वह एक संस्कार, एक धार्मिक परंपरा, और एक परिवारिक एकता का दिन बन जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>ज्योतिष और रविवार</strong></span></h5>
<div style="text-align:justify;">ज्योतिष के अनुसार रविवार सूर्य का दिन होता है। सूर्य यदि किसी की कुंडली में नीच राशि में है या अशुभ प्रभाव में है, तो रविवार के उपाय अत्यंत लाभकारी सिद्ध होते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<img src="https://www.wagadsandesh.com/media/2025-06/1644478692-5885.jpg" alt="worship-suryadev-on-sunday-in-this-way-according-to-astrology-wagadsandesh" width="740" height="592"></img>
प्रतीकात्मक चित्र

<h5 style="text-align:justify;"> </h5>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>कुछ ज्योतिषीय उपाय: Raviwar ke jyotish upay</strong></span></h5>
<div style="text-align:justify;"><strong>तांबे के पात्र में जल भरकर उसमें लाल फूल, गुड़ और रोली डालकर सूर्य को अर्घ्य दें।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>सूर्य नमस्कार या सूर्य मंत्र “ॐ घृणिः सूर्याय नमः” का 108 बार जाप करें।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>बुजुर्गों का आदर करें – क्योंकि सूर्य पिता का कारक है।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>इन उपायों से सूर्य के दोष शांत होते हैं और आत्मबल में वृद्धि होती है।</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong> </strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>संबंधित पढ़े : <span style="color:rgb(53,152,219);"><a style="color:rgb(53,152,219);" href="https://www.wagadsandesh.com/religious/sunday-fast-story-raviwar-vrat-katha-in-hindi-which-wagadsandesh/article-48">रविवार व्रत कथा (Raviwar Vrat Katha in Hindi) — जिसे रविवार के व्रत या सूर्य देव की पूजा के समय पढ़ा या सुना जाता है</a></span></strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>धार्मिक यात्राएं और दान</strong></span></h5>
<div style="text-align:justify;"> Raviwar ko kya daan karna chahiye रविवार को धार्मिक यात्राएं करना, मंदिरों में दर्शन करना और दान-पुण्य करना अत्यंत शुभ माना गया है। इस दिन यदि किसी रोगी को औषधि दान करें, किसी भूखे को भोजन कराएं या जरूरतमंद को वस्त्र दें, तो उसका पुण्य कई गुना बढ़कर लौटता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>रविवार को किए जा सकने वाले दान:</strong></h5>
<div style="text-align:justify;"><strong>लाल वस्त्र</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>गुड़</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>गेहूं</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>तांबे का बर्तन</strong></div>
<div style="text-align:justify;"><strong>आंखों की दवा (सूर्य नेत्रों के भी कारक हैं)</strong></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:center;">“जैसे सूर्य बिना किसी भेदभाव के सभी को प्रकाश देता है, वैसे ही हम भी इस रविवार संकल्प लें कि जीवन में सबके लिए उपयोगी बनें।”<br /><strong>ॐ सूर्याय नमः।</strong></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धार्मिक</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Jun 2025 17:28:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[वागड़ संदेश ब्यूरो]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सोगात : करणी माता मंदिर दर्शन करना अब होगा आसान: रेलवे ने देशनोक में शुरू किया नया ठहराव</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(241,196,15);">Karni Mata Railway News : बीकानेर के करणी माता मंदिर जाने वाले भक्तों के लिए खुशखबरी है। रेलवे ने देशनोक स्टेशन पर चार जोड़ी सुपरफास्ट और एक्सप्रेस ट्रेनों को रोकने का फैसला किया है। यह सुविधा अभी कुछ समय के लिए ही है। इससे बीकानेर और आसपास के लोगों को बहुत फायदा होगा।</span></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.wagadsandesh.com/religious/sogat-karni-mata-temple-darshan-will-now-be-easy-to/article-1"><img src="https://www.wagadsandesh.com/media/400/2021-03/5-696x462.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><strong>बीकानेर । </strong>देशभर में अपने चूहों वाले मंदिर के लिए विश्व विख्यात करणी माता मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को अब रेलवे की ओर से खास सौगात मिली है। उत्तर पश्चिम रेलवे ने श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए देशनोक रेलवे स्टेशन पर चार जोड़ी सुपरफास्ट और एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव की घोषणा की है। यह सुविधा प्रायोगिक आधार पर आगामी आदेशों तक जारी रहेगी। उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी कैप्टन शशि किरण के अनुसार, रेलवे की इस घोषणा से न केवल बीकानेर और आसपास के श्रद्धालुओं को लाभ मिलेगा, बल्कि दूर-दराज से आने वाले भक्तों की यात्रा भी अधिक सुविधाजनक और सहज हो जाएगी।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h4 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>जानिए कौन-कौन सी ट्रेनें रुकेंगी देशनोक स्टेशन पर</strong></span></h4>
<p> </p>
<p><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong><img src="https://www.wagadsandesh.com/media/2025-06/sogat-karni-mata-temple-darshan-will-now-be-easy-to-wagadsandesh2.png" alt="sogat-karni-mata-temple-darshan-will-now-be-easy-to-wagadsandesh2" width="1080" height="1350"></img></strong></span></p>
<div style="text-align:justify;"><strong>1 -22463/64 दिल्ली सराय रोहिल्ला - बीकानेर - दिल्ली सराय रोहिल्ला (राजस्थान संपर्क क्रांति सुपरफास्ट) [द्वि-साप्ताहिक]</strong></div>
<div style="text-align:justify;">- 22463 (दिल्ली/बीकानेर): 06:56 आगमन 7 06:58 प्रस्थान (13 जून से)</div>
<div style="text-align:justify;">- 22464 (बीकानेर/दिल्ली): 18:34 आगमन 7 18:36 प्रस्थान (10 जून से)</div>
<div style="text-align:justify;">----------------------</div>
<div style="text-align:justify;"><strong>2 - 22737/38 सिकंदराबाद - हिसार - सिकंदराबाद सुपरफास्ट [द्वि-साप्ताहिक]</strong></div>
<div style="text-align:justify;">- 22737 (सिकंदराबाद/हिसार): 11:42 आगमन 7 11:44 प्रस्थान (10 जून से)</div>
<div style="text-align:justify;">- 22738 (हिसार/सिकंदराबाद): 19:52 आगमन 7 19:54 प्रस्थान (13 जून से)</div>
<div style="text-align:justify;">---------------------</div>
<div style="text-align:justify;"><strong>3 - 19223/24 साबरमती - जम्मूतवी - साबरमती एक्सप्रेस [प्रतिदिन]</strong></div>
<div style="text-align:justify;">- 19223 (साबरमती/ जम्मूतवी): 22:34 आगमन 7 22:36 प्रस्थान (9 जून से)</div>
<div style="text-align:justify;">- 19224 (जम्मूतवी / साबरमती): 01:00 आगमन 7 01:02 प्रस्थान (9 जून से)</div>
<div style="text-align:justify;">---------------------</div>
<div style="text-align:justify;"><strong>4- 19225/26 भगत की कोठी - जम्मूतवी - भगत की कोठी एक्सप्रेस [प्रतिदिन]</strong></div>
<div style="text-align:justify;">- 19225 (भगत की कोठी/जम्मूतवी): 10:52 आगमन 7 10:54 प्रस्थान (9 जून से)</div>
<div style="text-align:justify;">- 19226 (जम्मूतवी/भगत की कोठी): 16:06 आगमन 7 16:08 प्रस्थान (8 जून से)</div>
<div style="text-align:justify;">--------------------</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>क्यों खास है करणी माता का मंदिर?</strong></span></h5>
<p> </p>
<p><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong><img src="https://www.wagadsandesh.com/media/2025-06/sogat-karni-mata-temple-darshan-will-now-be-easy-to-wagadsandesh3.webp" alt="sogat-karni-mata-temple-darshan-will-now-be-easy-to-wagadsandesh3" width="355" height="199"></img></strong></span></p>
<div style="text-align:justify;">देशनोक का करणी माता मंदिर 'चूहों वाला मंदिर' के नाम से दुनियाभर में प्रसिद्ध है। यहां हजारों की संख्या में सफेद और काले चूहे स्वतंत्र रूप से विचरण करते हैं और भक्त उन्हें माता का रूप मानकर श्रद्धा से देखते हैं। इस मंदिर में चूहों द्वारा खाया गया प्रसाद और स्पर्श किया गया जल भी श्रद्धा से ग्रहण किया जाता है, जो इसे आस्था और विज्ञान दोनों दृष्टिकोण से अनोखा बनाता है। यह मंदिर बीकानेर और जोधपुर राजघराने की कुलदेवी करणी माता को समर्पित है, जिन्हें दुर्गा का अवतार माना जाता है। मान्यता है कि यहां दर्शन मात्र से शनि और राहु जैसे ग्रहदोष भी शांत हो जाते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h4 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>हाल ही में पीएम मोदी ने किए थे दर्शन</strong></span></h4>
<p><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong><img src="https://www.wagadsandesh.com/media/2025-06/sogat-karni-mata-temple-darshan-will-now-be-easy-to-wagadsandesh4.jpg" alt="sogat-karni-mata-temple-darshan-will-now-be-easy-to-wagadsandesh4" width="699" height="416"></img></strong></span></p>
<div style="text-align:justify;">गौरतलब है कि 22 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी करणी माता के दर्शन को पहुंचे थे। उन्होंने देशनोक रेलवे स्टेशन से कई रेल परियोजनाओं का लोकार्पण भी किया था, जिसके बाद से मंदिर और स्टेशन दोनों राष्ट्रीय सुर्खियों में आ गए थे।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रदेश</category>
                                            <category>धार्मिक</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Jun 2025 14:36:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[वागड़ संदेश ब्यूरो]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>&quot;निर्जला एकादशी 2025: व्रत की विधि, नियम, महत्व और भीम-व्यास मुनि से जुड़ी पौराणिक कथा जानें&quot;</title>
                                    <description><![CDATA[<p><span style="color:rgb(230,126,35);">हिन्दू धर्म में विशेष महत्व वाले निर्जला एकादशी का व्रत आगामी 06 जून को रखा जाएगा। निर्जला एकादशी को लेकर लोगों में असमजंस की स्थित है। दशमी के बाद एकादशी का पर्व मनाया जाता है। काफी लोग इस बात को ध्यान में रखते हुए शुक्रवार को एकादशी का पर्व मना रहे हैं।</span></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.wagadsandesh.com/religious/nirjala-ekadashi-2025-nirjala-ekadashi-2025-fasting-law-rules-importance/article-9"><img src="https://www.wagadsandesh.com/media/400/2021-03/fitness.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>Wagad Sandesh |</strong></span> हिन्दू धर्म में विशेष महत्व वाले निर्जला एकादशी का व्रत आगामी 06 जून को रखा जाएगा। निर्जला एकादशी को लेकर लोगों में असमजंस की स्थित है। दशमी के बाद एकादशी का पर्व मनाया जाता है। काफी लोग इस बात को ध्यान में रखते हुए शुक्रवार को एकादशी का पर्व मना रहे हैं। शनिवार को उदयाकाल से एकाशी है। हिन्दू पंचाग के अनुसार, वृषभ और मिथुन संक्रांति के बीच ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी निर्जला एकादशी कहलाती है। ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 06 जून शुक्रवार को रात 02 बजकर 15 मिनट पर शुरू होगी। द्वादशी में एकादशी का पर्व मनाने से धन लक्ष्मी के साथ भक्ति की प्राप्ति होती है।इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और कथा सुनना चाहिए। इसके साथ ही इस तिथि पर रात में जागरण करना भी शुभ माना जाता है। द्वादशी के दिन सूर्योदय के बाद व्रत का पारण किया जाता है</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>निर्जला एकादशी पर यह कथा पढ़ें-</strong></span> निर्जला एकादशी का पर्व भीमसेन से जुड़ा है, इसलिए इसे भीमसेनी एकादशी कहते हैं, इसकी कथा भी भीम से जुड़ी है। भूख सहन न होने के कारण भीम एकादशी व्रत नहीं कर पाते थे, तो व्यास मुनि ने उन्हें भीमसेनी एकादशी के बारे में बताया।</div>
<div style="text-align:justify;">जीवन के सभी पापों से मुक्ति और मोक्ष प्राप्ति के लिए लोगों को निर्जला एकादशी व्रत रखना जरूरी है। इस साल यह व्रत 6 जून को है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी को बिना कुछ खाए- पीए विधिवत निर्जला उपवास रख भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने से जीवन के सभी पाप खत्म हो जाते हैं और भक्त मोक्ष प्राप्त कर सीधे विष्णु लोक चले जाते हैं। उन्हें जन्म-मरण के बंधन से छुटकारा मिल जाता है। यशवंत ने कहा कि व्रतियों को ज्येष्ठ शुक्ल दशमी तिथि की शाम से द्वादशी की सुबह तक 36 घंटे का निर्जला उपवास रखना बेहद जरूरी है। </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>यहां पढ़ें निर्जला एकादशी व्रत कथा</strong></span></h5>
<div style="text-align:justify;">व्यास मुनि के पास जाकर भीमसेन ने पुकार की कि मेरी माता कुंती और भ्राता युधिष्ठिर, अर्जुन, नकुल, सहदेव और द्रोपदी सभी एकादशी का व्रत करते हैं, ये लोग मुझे भी शिक्षा देते हैं कि तू अन्न मत खा, नर्क में जाएगा। अब मुनिवर आप ही बताएं कि मैं क्या करूं। हर 15 दिन के बाद एक एकादशी आ जाती है और हमारे घर में झगड़ा होता है। भीम ने कहा कि मेरे उदर में अग्नि का निवास है, अगर मैं अन्न की आहूति नहीं डालूंगा तो चर्बी को चाट जाएगी। शरीर की रक्षा करना मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म है, इसलिए आप ही बताएं कि मैं क्या करूं। कोई ऐसा उपाय बताएं, जिससे सांप भी मर जाए और लाठी भी ना टूटे। उन्होंने बोला कि कोई ऐसा व्रत, जिसे साल में एक बार करना हो और मन में व्याधियों का नाश हो सके। 24 एकादशियों का फल मात्र उस एक व्रत से मिल जाए। व्यास जी बोले-ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी का नाम है, निर्जला। इस व्रत में ठाकुरजी का चरणोदिक वर्जित नहीं, कारण वह अकाल मुत्यु का हरण करने वाली है।</div>
<div style="text-align:justify;">जो इस निर्जला एकादशी का व्रत श्रद्धा से करते हैं, उन्हें 24 एकादशियों का फल मिलता है और वो स्वर्ग को जाता है। व्रत में पितरों के लिए पंखा, छाता, कपड़े का जूता, सोमा, चांदी, मिट्टी का घड़ा, फल दान करें। मीठे जल का प्याऊ लगवाएं। मुख से ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नम: का जाप करें। यह श्रीमदभागवत पुराण का सार है। अगर आप फलाहारी हैं, तो ध्रुव के प्रथम मास की तपस्या के समान फल मिलेगा। अगर आप पवन आहारी आज रह सकोतो षटवे मास की तपस्ता के बराबर फल मिलेगा। इस व्रत में श्रद्धा को पूरा रखना और किसी नास्तिक का संग ना करना, दृष्चट में प्रेम का रस भरना। सभी को वासुदेव का रूप समधकर नमस्कार करना। किसी के लिए हिंसा ना करने, अपराध करने वाले का अपराध क्षमा करना। क्रोध ना करना, सच बोलना और मन में भगवान की मूर्ति का ध्यान करना। मुख से द्वादश अक्षरे मंत्र का ध्यान करना। इस दिन भजन करने चाहिए और रात को जागरण, जिसमें रामलील, कृष्ण लीला का कीर्तन हो, द्वादशी के दिन पहले ब्राहमणों को खिलाएं, दक्षिणा दें, उनकी परिक्रमा करें, और वर मांगे। ऐसी श्रद्धा भक्ति से व्रत करने वाले को कल्याण मिलता है। जो प्राणी मात्र को वासुदेव की प्रतिमा समझता है, उसका मेरी कलम लाखों प्रणाम के योग्य समझती है। निर्जला एकादशी का महात्मय सुनने से आंखे खुल जाती हैं। प्रभु घूंघट उतार मन के मंदिर में दिखते हैं। इस एकादशी को भीममसैनी एकादशी भी कहते हैं। इत श्री कथा संपूर्णम</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धार्मिक</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Jun 2025 01:36:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[वागड़ संदेश ब्यूरो]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Ram mandir: &quot;रामलला से राजा राम तक: अयोध्या में हुई रामदरबार की प्राण प्रतिष्ठा&quot;</title>
                                    <description><![CDATA[<p><span style="color:rgb(224,62,45);">गंगा दशहरा के दिन अयोध्या के राम मंदिर में राम दरबार समेत आठ देव विग्रहों की प्राण प्रतिष्ठा का अनुष्ठान आज संपन्न हुआ।राम दरबार समेत आठ देव विग्रहों की प्राण प्रतिष्ठा के लिए खास तौर पर आज गंगा दशहरा का दिन चुना गया।  </span></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.wagadsandesh.com/religious/ram-mandir-ramlala-to-raja-rams-life-in-ayodhya/article-8"><img src="https://www.wagadsandesh.com/media/400/2021-03/37.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>प्राण प्रतिष्ठा के लिए खास तौर पर गंगा दशहरा का दिन</strong></span></h5>
<div style="text-align:justify;">गंगा दशहरा के दिन अयोध्या के राम मंदिर में राम दरबार समेत आठ देव विग्रहों की प्राण प्रतिष्ठा का अनुष्ठान आज संपन्न हुआ।राम दरबार समेत आठ देव विग्रहों की प्राण प्रतिष्ठा के लिए खास तौर पर गंगा दशहरा का दिन चुना गया। इस दिन अभीजीत में सुबह 11:25 से 11:40 बजे तक प्राण प्रतिष्ठा की हई। गंगा दशहरा के दिन सिद्ध योग भी बन रहा है। इससे पहले दो दिन तक लगातार संस्कार और अधिवास परंपरा चली।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>3 जून से ही शुरु हो गया था प्राण प्रतिष्ठा का अनुष्ठान</strong></span></h5>
<div style="text-align:justify;">सुबह छह बजे से प्राण प्रतिष्ठा का अनुष्ठान शुरू हो गया। सुबह देवताओं का पूजन यज्ञमंडप में किया गया। इसके बाद प्राण प्रतिष्ठा का अनुष्ठान शुरू कर दिया गया। प्राण प्रतिष्ठा से पहले बुधवार को विभिन्न अधिवास हुए और उत्सव विग्रहों का परिसर भ्रमण कराया गया। भारत की 21 पवित्र नदियों के जल से सभी देव विग्रहों का अभिषेक हुआ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>भगवान के आभूषणों के साथ तीर और गजा भी</strong></span></h5>
<div style="text-align:justify;">भगवान के आभूषणों में किरीट-कुंडल व मुकुट से लेकर कंठाहार, बाजू बंद करधनी, कंगन व ब्रेसलेट के अलावा माता सीता के सभी आभूषण एवं देवी -देवताओ के स्वर्ण निर्मित आयुध भी लाए गए है। इन आयुधों में तीर-धनुष व गदा के अतिरिक्त कटार व कृपाण भी शामिल हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>राम मंदिर के प्रथम तल पर स्थापित राम दरबार की मूर्ति का भी पूजन</strong></span></h5>
<div style="text-align:justify;">वैदिक आचार्य के द्वारा स्थान पूजन संपन्न करने के साथ राम मंदिर के प्रथम तल पर स्थापित राम दरबार की मूर्ति का भी पूजन हुआ। विश्व में भगवान राम को चांदी से बने धनुष बाण को भी धारण कराया गया। इसके साथ ही राम मंदिर के परकोटे में स्थित श्री गणेश, शिव, हनुमान, भगवती, अन्नपूर्णा,भगवान सूर्य एवं शेषावतार के विग्रहों की भी हुई प्राण प्रतिष्ठा हुई, जिसमें सीएम योगी आदित्यनाथ ने सभी सात मंदिरों में जाकर पूजा अर्चना की ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h4 style="text-align:justify;"><strong><span style="color:rgb(224,62,45);">वैदिक मंत्रोच्चार और विशेष पूजा में हुई प्राण प्रतिष्ठा</span></strong></h4>
<div style="text-align:justify;">अयोध्या के राम मंदिर में राम दरबार में गुरुवार को सुबह प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान हुआ। प्राण प्रतिष्ठा में मूर्तियों की स्थापना के लिए विशेष पूजा, वैदिक मंत्रोच्चार और हवन समारोह किया गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h4 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>राजा राम व माता सीता सहित सभी देव विग्रहों के लिए हीरा-मोती जड़ित स्वर्णाभूषण</strong></span></h4>
<div style="text-align:justify;">भगवान के श्रृंगार के लिए बुधवार को राजा राम व माता सीता सहित सभी देव विग्रहों के लिए हीरा-मोती जड़ित स्वर्णाभूषणों को लाया गया। आपको बता दें कि गुजरात के दिलीप भाई ने इन सभी आभूषणों को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की सहमति के बाद रामलला को समर्पित किया है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धार्मिक</category>
                                    

                <link>https://www.wagadsandesh.com/religious/ram-mandir-ramlala-to-raja-rams-life-in-ayodhya/article-8</link>
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                <pubDate>Fri, 06 Jun 2025 01:29:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[वागड़ संदेश ब्यूरो]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> आज का दिन: निर्जला एकादशी और आत्मशुद्धि का पर्व</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(230,126,35);">निर्जला एकादशी केवल एक उपवास नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुशासन है। यह दिन हमें संयम, साधना, सेवा और श्रद्धा की प्रेरणा देता है। भीमसेन जैसे वीर योद्धा ने भी इसका पालन कर आत्मिक शांति प्राप्त की, तो हम जैसे सामान्य जन भी इस दिन व्रत, ध्यान और दान के माध्यम से ईश्वर की कृपा के पात्र बन सकते हैं।</span></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.wagadsandesh.com/religious/today-is-the-festival-of-nirjala-ekadashi-and-self-purification/article-7"><img src="https://www.wagadsandesh.com/media/400/2021-03/38.jpg" alt=""></a><br /><div style="text-align:justify;">आज का दिन सनातन धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत पावन और पुण्यदायी है। आज ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है, जिसे निर्जला एकादशी के नाम से जाना जाता है। यह एकादशी सभी 24 एकादशियों में सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि यह अकेले ही सभी एकादशियों का फल प्रदान करती है। इस दिन श्रद्धालु उपवास रखकर भगवान विष्णु की आराधना करते हैं और जल तक ग्रहण नहीं करते – इसी कारण इसे ‘निर्जला’ कहा गया है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>✨ निर्जला एकादशी का महत्व</strong></span></h5>
<div style="text-align:justify;">हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को भगवान विष्णु की कृपा प्राप्ति का विशेष साधन माना गया है। प्रत्येक पक्ष में एक एकादशी आती है – कृष्ण और शुक्ल, इस प्रकार वर्ष में 24 एकादशियां होती हैं। लेकिन कुछ लोग नियमित रूप से एकादशी का व्रत नहीं रख पाते। ऐसे श्रद्धालुओं के लिए यह एक दिन – निर्जला एकादशी – सभी व्रतों के बराबर पुण्य प्रदान करता है।</div>
<div style="text-align:justify;">पुराणों के अनुसार, भीमसेन (महाभारत के भीम) ने अन्य एकादशी व्रतों में अन्न का त्याग करना कठिन पाया, अतः महर्षि व्यास के सुझाव पर उन्होंने सिर्फ निर्जला एकादशी का कठोर व्रत किया और कहा गया कि इस एक व्रत से उन्हें सभी एकादशियों का फल प्राप्त हुआ।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h5 style="text-align:justify;"><strong><span style="color:rgb(224,62,45);">🧘 व्रत की विधि और नियम</span></strong></h5>
<div style="text-align:justify;">इस दिन व्रती सूर्योदय से पहले उठकर स्नान कर पवित्र संकल्प लेता है। उसके बाद दिन भर जल, अन्न, फल आदि किसी भी वस्तु का सेवन नहीं करता – केवल भगवान विष्णु का ध्यान और पूजन करता है। कुछ श्रद्धालु संध्या आरती के बाद तुलसी जल या चरणामृत ग्रहण करके व्रत का पारण करते हैं, जबकि कुछ अगले दिन द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद व्रत खोलते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>व्रत के नियम इस प्रकार हैं:</strong></span></h5>
<div style="text-align:justify;">
<ol style="list-style-type:upper-roman;">
<li>ब्रह्ममुहूर्त में स्नान और संकल्प</li>
<li>पूरे दिन उपवास – जल भी वर्जित</li>
<li>विष्णु सहस्त्रनाम, गीता और भागवत का पाठ</li>
<li>रात्रि जागरण एवं भजन-कीर्तन</li>
<li>द्वादशी को ब्राह्मणों को अन्न-जल दान और व्रत का पारण</li>
</ol>
</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>📖 निर्जला एकादशी की पौराणिक कथा</strong></span></h5>
<div style="text-align:justify;">भीमसेन को अन्न का अत्यधिक मोह था। जब उन्होंने देखा कि उनके भाई – युधिष्ठिर, अर्जुन, नकुल और सहदेव सभी एकादशी का पालन करते हैं, तो उन्होंने भी इस पुण्य को प्राप्त करने की इच्छा जताई। लेकिन भोजन के बिना रहना उनके लिए संभव नहीं था। तब महर्षि व्यास जी ने उन्हें एक उपाय बताया – "यदि तुम वर्ष भर की सभी एकादशियों का पुण्य प्राप्त करना चाहते हो, तो निर्जला एकादशी का व्रत करो। इस दिन जल भी ग्रहण नहीं किया जाता, और यह सबसे कठिन व्रत माना जाता है।"</div>
<div style="text-align:justify;">भीमसेन ने इस व्रत को पूरी निष्ठा से किया और उन्हें समस्त एकादशियों का फल प्राप्त हुआ। तभी से यह परंपरा बनी कि यदि कोई अन्य एकादशी नहीं कर सकता तो कम से कम निर्जला एकादशी अवश्य करे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>🌿 दान और सेवा का महत्व</strong></span></h5>
<div style="text-align:justify;">इस दिन गरीबों और ब्राह्मणों को जल, घड़ा, छाता, कपड़े, सत्तू, फल और गंगा जल का दान करना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। अनेक स्थानों पर जल से भरे मटके, शरबत, लस्सी और छाछ का वितरण भी किया जाता है। यह कार्य सामाजिक समरसता और सेवा की भावना को भी जाग्रत करता है।</div>
<div style="text-align:justify;">धार्मिक दृष्टिकोण से दान देने का अर्थ केवल वस्तुएं देना नहीं, बल्कि अपने भीतर की तामसिक वृत्तियों का त्याग भी है – जैसे क्रोध, ईर्ष्या, आलस्य, कटुता और घृणा। यदि व्यक्ति आज के दिन इन नकारात्मक प्रवृत्तियों का त्याग करे, तो वह सच्चे अर्थों में एकादशी का पालन करता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>🛕 विशेष पूजा स्थल और आयोजन</strong></span></h5>
<div style="text-align:justify;">आज के दिन अयोध्या, वृंदावन, हरिद्वार, द्वारका, उज्जैन जैसे धर्मस्थलों पर विशेष भीड़ उमड़ती है। मंदिरों में शंख-घंटाध्वनि, भजन-कीर्तन, विष्णु सहस्त्रनाम और गंगा स्नान की विशेष व्यवस्था रहती है।</div>
<div style="text-align:justify;">अयोध्या में तो इस दिन रामलला के साथ-साथ रामदरबार की भी भव्य झांकी सजाई जाती है। राम की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर हजारों श्रद्धालु वहां दर्शन को उमड़ते हैं। कई भक्तों के लिए यह दिन केवल व्रत ही नहीं, रामनाम जप और साधना का विशेष पर्व बन जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>🔮 आधुनिक समय में निर्जला एकादशी</strong></span></h5>
<div style="text-align:justify;">आज की तेज़-रफ्तार जिंदगी में जहां लोग रोज़मर्रा की ज़िम्मेदारियों में उलझे रहते हैं, वहां यह एक दिन आत्मनिरीक्षण और साधना के लिए एक शानदार अवसर देता है। जब व्यक्ति एक दिन के लिए अन्न और जल से दूर होकर आत्मा के निकट आता है, तो उसे ध्यान, संयम और आत्मशुद्धि का वास्तविक अनुभव होता है।</div>
<div style="text-align:justify;">यह व्रत स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी लाभकारी माना गया है – एक दिन का उपवास शरीर को विषैले तत्वों से मुक्त करता है और आंतरिक शुद्धि में सहायक होता है। इस एक दिन का व्रत वर्ष भर के सभी व्रतों का फल प्रदान करता है – परंतु केवल नियमों का पालन और पवित्र मन से की गई पूजा ही इसका असली सार है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:center;"><span style="color:rgb(230,126,35);"><em>|| ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ||</em></span></div>
<div style="text-align:center;"><span style="color:rgb(230,126,35);"><em>|| हरि बोल || जय श्री विष्णु ||</em></span></div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धार्मिक</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Jun 2025 01:28:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[वागड़ संदेश ब्यूरो]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शनिवार : न्याय और तपस्या के देवता शनिदेव की आराधना का दिन | पूरा पढ़े </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(230,126,35);">हिंदू धर्म में सप्ताह के प्रत्येक दिन का एक विशेष महत्व है, लेकिन Shanivar का दिन विशेष रूप से न्याय के देवता शनि महाराज को समर्पित होता है। यह दिन तप, संयम, श्रद्धा और आत्मचिंतन का प्रतीक है। शनिदेव कर्मों के अनुसार फल देने वाले देवता हैं, जो मनुष्य को उसके अच्छे या बुरे कर्मों के आधार पर दंड या पुरस्कार देते हैं।</span></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.wagadsandesh.com/religious/shanivar-read-the-day-of-worship-of-shani-dev-the/article-6"><img src="https://www.wagadsandesh.com/media/400/2021-03/40.jpg" alt=""></a><br /><h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>शनिदेव का परिचय :</strong></span></h5>
<div style="text-align:justify;">शनि देव, सूर्यदेव और छाया (संवर्णा) के पुत्र हैं। इन्हें नवग्रहों में सबसे शक्तिशाली और भयभीत करने वाला ग्रह माना जाता है। शनि का प्रभाव जब कुंडली में सही स्थान पर होता है, तो व्यक्ति को ऊँचाइयों तक पहुँचाता है, वहीं अगर अशुभ स्थिति में हो तो जीवन में अनेक बाधाएँ आती हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">शनि को काल, यम और कर्म का प्रतिनिधि भी माना गया है। वे धीमे चलने वाले ग्रह हैं और किसी राशि में लगभग ढाई वर्ष तक रहते हैं, जिससे ‘साढ़ेसाती’ और ‘ढैय्या’ जैसे प्रभाव बनते हैं। शनिदेव न्यायप्रिय हैं, इसलिए उन्हें 'धर्म के रक्षक' के रूप में भी पूजा जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>शनिवार के दिन का महत्व:</strong></span></h5>
<div style="text-align:justify;">शनिवार को शनिदेव की पूजा करने से उनकी कृपा प्राप्त होती है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। मान्यता है कि इस दिन शनिदेव की आराधना से शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और अन्य दोष शांत होते हैं। यह दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए अत्यंत लाभकारी है, जिनकी कुंडली में शनि दोष या शनि की अशुभ दशा चल रही हो।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><img src="https://www.wagadsandesh.com/media/2025-06/shanivar-read-the-day-of-worship-of-shani-dev-the.jpg" alt="shanivar-read-the-day-of-worship-of-shani-dev-the" width="700" height="376"></img></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>शनिवार के दिन क्या करें?</strong></span></h5>
<div style="text-align:justify;"><strong>1. प्रातः स्नान और शुद्धता:</strong></div>
<div style="text-align:justify;">शनिवार को सूर्योदय से पूर्व स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण करें। काले या नीले वस्त्र इस दिन विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>2. शनि देव का पूजन:</strong></div>
<div style="text-align:justify;">काले तिल, सरसों का तेल, नीला फूल, काले वस्त्र, लोहे का दीपक आदि से शनि देव की पूजा की जाती है। शनि देव की मूर्ति या पीपल के पेड़ के नीचे तेल का दीपक जलाकर ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र का जाप करें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>3. पीपल की पूजा:</strong></div>
<div style="text-align:justify;">शनिवार को पीपल के वृक्ष की पूजा करने का विशेष महत्व है। पीपल को जल अर्पित करें, कच्चा दूध और काले तिल मिलाकर चढ़ाएं और सात परिक्रमा करें।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>4. दान और सेवा:</strong></div>
<div style="text-align:justify;">शनिवार को काले तिल, काला कपड़ा, लोहा, कंबल, उड़द, तेल, छाता आदि का दान करना अत्यंत पुण्यकारी होता है। निर्धनों, विकलांगों, वृद्धों और गायों की सेवा करने से शनि की कृपा मिलती है।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><strong>5. हनुमान जी की पूजा:</strong></div>
<div style="text-align:justify;">शनिदेव हनुमानजी से बहुत भयभीत रहते हैं। अतः शनिवार को हनुमान जी की पूजा और सुंदरकांड पाठ करने से भी शनि दोष शांत होते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>शनिवार से जुड़ी प्रमुख धार्मिक मान्यताएं:</strong></span></h5>
<div style="text-align:justify;">- शनिवार को बाल कटवाना, नाखून काटना या नया कार्य शुरू करना वर्जित माना गया है।</div>
<div style="text-align:justify;">- इस दिन लोहे की वस्तुएं, चमड़े की चीजें या नीले वस्त्र खरीदने से शनि कृपा प्राप्त होती है।</div>
<div style="text-align:justify;">- शनि महाराज को तेल अर्पित करना अत्यंत शुभ होता है। विशेषकर सरसों के तेल से अभिषेक करने से वे शीघ्र प्रसन्न होते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"><img src="https://www.wagadsandesh.com/media/2025-06/shanivar-read-the-day-of-worship-of-shani-dev-the-wagad-sandesh.webp" alt="shanivar-read-the-day-of-worship-of-shani-dev-the-wagad-sandesh" width="640" height="360"></img></div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>🪔 शनिदेव और राजा विक्रमादित्य की कथा (विस्तृत रूप)</strong></span></h5>
<div style="text-align:justify;">प्राचीन काल की बात है। उज्जैन के राजा विक्रमादित्य को न्यायप्रिय, साहसी और प्रजा हितैषी राजा माना जाता था। उनके दरबार में एक बार नवग्रहों की विशेष चर्चा चल रही थी। राजा ने सभी ग्रहों के प्रभाव, गुण-दोष और स्थान का आकलन कर, उन्हें क्रमबद्ध करके आसन पर बैठाने का निर्णय लिया।</div>
<div style="text-align:justify;">राजा ने सूर्य को प्रथम स्थान, चंद्र को दूसरा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, राहु और केतु को क्रमशः स्थान दिए। शनिदेव को उन्होंने अंतिम स्थान दिया — यह सोचकर कि शनि का प्रभाव धीमा और कष्टदायक माना जाता है।</div>
<div style="text-align:justify;">यह बात शनिदेव को बहुत बुरी लगी। उन्होंने सोचा – "राजा ने मेरा अपमान किया है। मैं उचित समय पर उन्हें अपने प्रभाव से यह समझा दूंगा कि मेरा स्थान कितना महत्वपूर्ण है।"</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(0,0,0);"><strong>🌑 शनि की परीक्षा शुरू होती है</strong></span></h5>
<div style="text-align:justify;">कुछ समय पश्चात शनिदेव की दृष्टि राजा विक्रमादित्य की कुंडली पर पड़ी और उन्होंने अपनी साढ़ेसाती का प्रभाव आरंभ कर दिया। राजा को कुछ समझ नहीं आया, लेकिन उनके जीवन में धीरे-धीरे परेशानियाँ बढ़ने लगीं।</div>
<div style="text-align:justify;">एक दिन राजा वेश बदलकर राज्य से बाहर भ्रमण पर निकले। रास्ते में उन्हें एक नगर में व्यापार करने का विचार आया। उन्होंने लकड़ी के खिलौने बेचने का धंधा शुरू किया। लेकिन दुर्भाग्यवश, उसी समय उस नगर में एक बहुमूल्य हार चोरी हो गया, और संयोगवश वह राजा के सामान में पाया गया (जो शनिदेव की लीला थी)। राजा को दोषी ठहराया गया और दंडस्वरूप दोनों हाथ काट दिए गए। एक समय वह महान सम्राट विक्रमादित्य अब एक अपंग भिखारी के रूप में जीवन व्यतीत करने लगे।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(0,0,0);"><strong>🙏 भक्ति और शनि कृपा का प्रारंभ</strong></span></h5>
<div style="text-align:justify;">समय बीतता गया। एक दिन राजा एक तेली (तेल बेचने वाला) के यहाँ रहने लगे। वे स्वभाव से शालीन और भक्ति भाव से परिपूर्ण थे। तेली की कन्या को जब भी शनि दोष के कारण परेशानियाँ आतीं, राजा प्रार्थना और पूजा से उसे शांत कर देते। उस कन्या के पिता को यह जानकर आश्चर्य हुआ और उन्होंने अपनी कन्या का विवाह राजा विक्रमादित्य से करने का निश्चय किया।</div>
<div style="text-align:justify;">विवाह के बाद एक रात्रि शनिदेव राजा के स्वप्न में प्रकट हुए और बोले – "राजन! आपने मेरा अपमान किया था, इसलिए मैंने आपको आपके कर्मानुसार दंड दिया। लेकिन आपने कभी हिम्मत नहीं हारी, किसी को दोष नहीं दिया और सच्चे मन से जीवन जिया। अब मैं आपसे प्रसन्न हूँ।"</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>शनि महाराज ने आशीर्वाद दिया और कहा –</strong></h5>
<div style="text-align:justify;">"अब तुम्हारे सभी दोष समाप्त हो गए हैं। तुम्हारे कटे हुए हाथ पुनः जुड़ जाएंगे और तुम अपने राज्य में लौटकर पुनः वैभवपूर्ण जीवन जीओगे।"</div>
<div style="text-align:justify;">सुबह होते ही राजा के हाथ पुनः आ गए। वह पुनः बलवान और सुंदर हो गए। नगरवासियों ने जब यह चमत्कार देखा, तो उनका सम्मान और भी बढ़ गया।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>👑 राजा का राज्य में पुनः आगमन</strong></h5>
<div style="text-align:justify;">राजा विक्रमादित्य अपनी पत्नी सहित अपने राज्य लौटे। राज्य की प्रजा उन्हें पहचानते ही आनंद से भर उठी। राजा ने दरबार में सभी नवग्रहों के लिए एक-एक मंदिर बनवाए, लेकिन शनिदेव के लिए स्वर्णमयी मंदिर बनवाकर उसमें काले घोड़े, काले तिल, सरसों का तेल और लोहे की मूर्ति की स्थापना की।</div>
<div style="text-align:justify;">राजा ने घोषणा की कि – "शनिदेव न केवल दंड देने वाले, बल्कि सुधार का मार्ग दिखाने वाले भी हैं। जो उन्हें भक्ति से पूजेगा, वह जीवन में कभी भयभीत नहीं होगा।"</div>
<h5 style="text-align:justify;"> </h5>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>📿 कथा का संदेश:</strong></h5>
<div style="text-align:justify;">शनि देव का प्रभाव हमारे कर्मों पर आधारित होता है।</div>
<div style="text-align:justify;">जो व्यक्ति ईमानदारी, संयम और भक्ति से जीवन जीता है, शनिदेव अंततः उस पर कृपा करते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">जीवन में जब कठिन समय आए, तो धैर्य, सेवा, तपस्या और सच्ची भक्ति को नहीं छोड़ना चाहिए।</div>
<div style="text-align:justify;">शनि देव दंड नहीं, सुधार देने वाले देवता हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">पीपल की पूजा, दान, हनुमान जी की भक्ति और सत्य के मार्ग पर चलने से शनि के अशुभ प्रभाव शांत होते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>शनिवार को पढ़े जाने वाले मंत्र:</strong></span></h5>
<div style="text-align:justify;">बीज मंत्र:</div>
<div style="text-align:justify;">ॐ शं शनैश्चराय नमः।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">शनि गायत्री मंत्र:</div>
<div style="text-align:justify;">ॐ सूर्यपुत्राय विद्महे महाकायाय धीमहि। तन्नो मन्दः प्रचोदयात्॥</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<div style="text-align:justify;">हनुमान मंत्र (शनि पीड़ा शांत करने हेतु):</div>
<div style="text-align:justify;">ॐ हं हनुमते नमः।</div>
<div style="text-align:justify;"> </div>
<h5 style="text-align:justify;"><span style="color:rgb(224,62,45);"><strong>शनिवार को क्या न करें? </strong></span></h5>
<div style="text-align:justify;">- दूसरों को अपमानित न करें, अन्यथा शनिदेव नाराज़ हो सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">- आलस्य और क्रोध से बचें, ये शनि के प्रभाव को और तीव्र कर सकते हैं।</div>
<div style="text-align:justify;">-  मांस-मदिरा का सेवन इस दिन वर्जित है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धार्मिक</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Jun 2025 01:11:10 +0530</pubDate>
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